Friday, 16 December 2016

सीखे हैं सबक हमने .........

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

रूठे हैं जो क़िस्मत के तारों के बहाने से
वो मान भी जाएँगे थोड़ा सा मनाने से

तन्हाई से घबरा के निकले थे सुकूँ पाने
गम ले के चले आए ख़ुशियों के घराने से

सीता तो हुई रुसवा ,मीरा को विष, अब भी
कृष्णा ये कहे ठहरो ! बाज़ आओ सताने से

सागर के सीने में एक आग भी होती है
भड़के तो कहाँ साथी ! बुझती है बुझाने से

हारेंगे न बैठेंगे कोई लाख जतन कर ले
सीखे हैं सबक़ हमने उस्ताद ज़माने से !

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(चित्र गूगल से साभार)

23 comments:

  1. बहुत भावपूर्ण गज़ल । 'हारेंगे न बैठेंगे कोई लाख जतन कर ले
    सीखे हैं सबक़ हमने उस्ताद ज़माने से !' उत्तम

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    1. इस सहृदय उपस्थिति के लिए हृदय से आभार आपका !
      सदैव स्नेहाशीष की कामना के साथ
      ज्योत्स्ना

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (18-12-2016) को "जीने का नजरिया" (चर्चा अंक-2559) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. इस स्नेह और सम्मान के लिए हृदय से आभार आ. शास्त्री जी ..
      सदैव स्नेहाशीष कि कामना के साथ
      ज्योत्स्ना

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  3. तन्हाई से घबरा के निकले थे सुकूँ पाने
    गम ले के चले आए ख़ुशियों के घराने से।

    बहुत खूब !

    एक एक अश्आर निखरा हुआ, तराशा हुआ।

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    1. हृदय से आभार प्रिय अनिता !
      ज्योत्स्ना

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  4. बेहद भावपूर्ण रचना ज्योत्स्ना जी!
    तन्हाई से ....बहुत बढ़िया!


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    1. बहुत-बहुत आभार सखी जी |

      ज्योत्स्ना

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  5. बेहद भावपूर्ण रचना ज्योत्स्ना जी!
    तन्हाई से ....बहुत बढ़िया!


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  6. बहुत सुंदर भावपूर्ण सृजन प्रिय सखी ज्योत्स्ना जी

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    1. दिल से शुक्रिया सखी जी :)

      ज्योत्स्ना

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  7. बहुत खूब ... सुन्दर शेर हैं पूरी ग़ज़ल में ...

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    1. बहुत-बहुत आभार आदरणीय !
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  9. मनभावन सुन्दर रचना प्रिय सखी ..हार्दिक बधाई

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  10. बहुत सुन्दर ! शुभकामनाओं सहित ,आभार। "एकलव्य"

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    1. बहुत-बहुत आभार आपका !
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  11. ग़ज़ल के शेर वज़्न होने पर ही प्रभावकारी होते हैं। नए रचनाकारों को इस ग़ज़ल को पढ़-पढ़कर सीखना चाहिए कि ग़ज़ल अपनी सम्पूर्णता के साथ कैसे पेश की जाय। न्यूनतम शब्दों में भावों को अधिक से अधिक कैसे समेटा जाता है और बिषयों को सरलीकृत कैसे किया जाता है यह बखूबी समझाती है यह प्रस्तुत ग़ज़ल। बधाई।

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    1. बहुत-बहुत आभार आपका !
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  12. ग़ज़ल के शेर वज़्न होने पर ही प्रभावकारी होते हैं। नए रचनाकारों को इस ग़ज़ल को पढ़-पढ़कर सीखना चाहिए कि ग़ज़ल अपनी सम्पूर्णता के साथ कैसे पेश की जाय। न्यूनतम शब्दों में भावों को अधिक से अधिक कैसे समेटा जाता है और बिषयों को सरलीकृत कैसे किया जाता है यह बखूबी समझाती है यह प्रस्तुत ग़ज़ल। बधाई।

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  13. बहुत सुन्दर....
    लाजवाब...
    वाह!

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  14. शुक्रिया ...बहुत-बहुत आभार आपका 😊

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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